वादà¥à¤¯ संगत करते समय तबला वादक के लिठआवशà¥à¤¯à¤• अनà¥à¤à¥‚तियाà¤
à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ शासà¥à¤¤à¥à¤°à¥€à¤¯ संगीत में तबला केवल à¤à¤• लय वादà¥à¤¯ नहीं है, बलà¥à¤•ि यह पूरे पà¥à¤°à¤¦à¤°à¥à¤¶à¤¨ का आधार और संतà¥à¤²à¤¨ à¤à¥€ है। जब à¤à¤• तबला वादक किसी वादà¥à¤¯ कलाकार (जैसे सितार, सरोद, बांसà¥à¤°à¥€ या वायलिन) के साथ संगत करता है, तब उसकी à¤à¥‚मिका और à¤à¥€ महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ हो जाती है। à¤à¤• उतà¥à¤•ृषà¥à¤Ÿ तबला संगतकार वही है जो अपने वादन से मà¥à¤–à¥à¤¯ कलाकार को सहारा दे, न कि उसे दबाà¤à¥¤ इस संदरà¥à¤ में कà¥à¤› महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ बिंदॠहैं जिनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ हर तबला वादक को धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ में रखना चाहिà¤à¥¤
1. सà¥à¤¨à¤¨à¤¾ सबसे महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£
संगत का पहला नियम है — सà¥à¤¨à¤¨à¤¾à¥¤ तबला वादक को मà¥à¤–à¥à¤¯ कलाकार के हर सूकà¥à¤·à¥à¤® à¤à¤¾à¤µ, मींड, गमक और लय के बदलाव को धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ से सà¥à¤¨à¤¨à¤¾ चाहिà¤à¥¤ यदि सà¥à¤¨à¤¨à¥‡ की कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ मजबूत है, तो संगत सà¥à¤µà¤¤à¤ƒ ही सटीक और पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¶à¤¾à¤²à¥€ बनती है। बिना सà¥à¤¨à¥‡ केवल बजाना संगत नहीं, बलà¥à¤•ि बाधा बन सकता है।
2. लय की सà¥à¤¥à¤¿à¤°à¤¤à¤¾ बनाठरखना
तबला वादक का सबसे बड़ा करà¥à¤¤à¤µà¥à¤¯ है लय को सà¥à¤¥à¤¿à¤° रखना। चाहे कलाकार कितनी à¤à¥€ जटिल तानों या layakari में जाà¤, तबला को लय का सà¥à¤¤à¤‚ठबनकर खड़ा रहना चाहिà¤à¥¤ लय की यह सà¥à¤¥à¤¿à¤°à¤¤à¤¾ ही पूरे पà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤à¥à¤¤à¤¿ को संतà¥à¤²à¤¿à¤¤ रखती है
3. सादगी में सौंदरà¥à¤¯
वादà¥à¤¯ संगत में अतà¥à¤¯à¤§à¤¿à¤• जटिलता दिखाने की आवशà¥à¤¯à¤•ता नहीं होती। खासकर आलाप और विलंबित गत में तबला को सरल, मधà¥à¤° और संयमित रहना चाहिà¤à¥¤ अनावशà¥à¤¯à¤• तिहाइयाठया à¤à¤°à¤¾à¤µ मà¥à¤–à¥à¤¯ कलाकार के à¤à¤¾à¤µ को कमजोर कर सकते हैं।
4. मà¥à¤–à¥à¤¯ कलाकार का समà¥à¤®à¤¾à¤¨
संगत करते समय यह हमेशा याद रखना चाहिठकि मंच पर मà¥à¤–à¥à¤¯ केंदà¥à¤° वादà¥à¤¯ कलाकार है। तबला वादक को अपने कौशल का पà¥à¤°à¤¦à¤°à¥à¤¶à¤¨ इस पà¥à¤°à¤•ार करना चाहिठकि वह कलाकार को उà¤à¤¾à¤°à¤¨à¥‡ में मदद करे, न कि धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ अपनी ओर खींच
5. समय की समठ(टाइमिंग
कब बोल à¤à¤°à¤¨à¤¾ है, कब शांत रहना है, और कब सम पर जोर देना है — यह समठबहà¥à¤¤ जरूरी है। सही समय पर दिया गया à¤à¤• छोटा सा ‘का’ या ‘धा’ à¤à¥€ पूरे पà¥à¤°à¤¦à¤°à¥à¤¶à¤¨ को जीवंत बना सकता है।
6. तान और बोलों की संगति
वादà¥à¤¯ कलाकार जब तान या जटिल पैटरà¥à¤¨ बजाता है, तब तबला वादक को उसके अनà¥à¤°à¥‚प अपने बोलों का चयन करना चाहिà¤à¥¤ इससे à¤à¤• संवाद (conversation) बनता है, जो शà¥à¤°à¥‹à¤¤à¤¾à¤“ं को बेहद आकरà¥à¤·à¤¿à¤¤ करता है।
7. आवाज़ का संतà¥à¤²à¤¨
तबला की धà¥à¤µà¤¨à¤¿ मà¥à¤–à¥à¤¯ वादà¥à¤¯ से अधिक नहीं होनी चाहिà¤à¥¤ धà¥à¤µà¤¨à¤¿ का संतà¥à¤²à¤¨ à¤à¤¸à¤¾ हो कि तबला सà¥à¤ªà¤·à¥à¤Ÿ सà¥à¤¨à¤¾à¤ˆ दे, लेकिन वह मà¥à¤–à¥à¤¯ वादà¥à¤¯ को ढक न दे। यह विशेष रूप से माइकà¥à¤°à¥‹à¤«à¥‹à¤¨ के उपयोग के समय महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ होता है।
8. घराने की शैली का संतà¥à¤²à¤¿à¤¤ उपयोग
हर तबला वादक अपने घराने की विशेषताओं के साथ आता है, लेकिन संगत करते समय उसे लचीला होना चाहिà¤à¥¤ आवशà¥à¤¯à¤•ता के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° शैली में बदलाव करना ही à¤à¤• परिपकà¥à¤µ कलाकार की पहचान है।
9. सम पर सटीक पकड़
सम à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ संगीत का सबसे महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ बिंदॠहै। तबला वादक को हमेशा सम पर सटीक और पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¶à¤¾à¤²à¥€ तरीके से पहà¥à¤‚चना चाहिà¤à¥¤ यह पूरे पà¥à¤°à¤¦à¤°à¥à¤¶à¤¨ की ऊरà¥à¤œà¤¾ को परिà¤à¤¾à¤·à¤¿à¤¤ करता है।
10. संवाद की à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾
संगत केवल साथ बजाना नहीं है, बलà¥à¤•ि यह à¤à¤• संवाद है। तबला और वादà¥à¤¯ कलाकार के बीच à¤à¤• अदृशà¥à¤¯ बातचीत चलती है। यह संवाद जितना गहरा होगा, पà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤à¥à¤¤à¤¿ उतनी ही पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¶à¤¾à¤²à¥€ होगी।
11. रचना की समà¤
जिस राग और बंदिश या गत को पà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤à¥à¤¤ किया जा रहा है, उसकी समठहोना आवशà¥à¤¯à¤• है। इससे तबला वादक बेहतर तरीके से संगत कर सकता है और पà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤à¥à¤¤à¤¿ के à¤à¤¾à¤µ को समठपाता है।
12. अनà¥à¤à¤µ और संवेदनशीलता
अंततः संगत à¤à¤• तकनीकी कौशल के साथ-साथ संवेदनशीलता का à¤à¥€ विषय है। अनà¥à¤à¤µ के साथ यह समठविकसित होती है कि कब कà¥à¤¯à¤¾ करना है और कितना करना है।
निषà¥à¤•रà¥à¤·
à¤à¤• शà¥à¤°à¥‡à¤·à¥à¤ तबला वादक वही है जो अपने वादन से मà¥à¤–à¥à¤¯ कलाकार को सशकà¥à¤¤ बनाà¤, पà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤à¥à¤¤à¤¿ में सौंदरà¥à¤¯ जोड़े और शà¥à¤°à¥‹à¤¤à¤¾à¤“ं को à¤à¤• संपूरà¥à¤£ अनà¥à¤à¤µ पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ करे। संगत में विनमà¥à¤°à¤¤à¤¾, सजगता और संवेदनशीलता ही सफलता की कà¥à¤‚जी है।
लेखक परिचय
शà¥à¤°à¥€ वी. नरहरी
उपाधà¥à¤¯à¤•à¥à¤· – Centre for Research & Promotion of Indian Music (CRPIM)
शà¥à¤°à¥€ वी. नरहरी à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ कला और सांसà¥à¤•ृतिक परिदृशà¥à¤¯ में 25 से अधिक वरà¥à¤·à¥‹à¤‚ की समृदà¥à¤§ विरासत के साथ à¤à¤• पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤ ित आरà¥à¤Ÿà¤ªà¥à¤°à¥‡à¤¨à¥à¤¯à¥‹à¤°, कà¥à¤¯à¥‚रेटर, सà¥à¤•à¥à¤°à¤¿à¤ªà¥à¤Ÿ राइटर और संगीतकार हैं। उनकी विशेषजà¥à¤žà¤¤à¤¾ और दूरदृषà¥à¤Ÿà¤¿ ने इस कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° पर गहरा पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ डाला है, तथा उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने à¤à¤¾à¤°à¤¤ सरकार के संसà¥à¤•ृति मंतà¥à¤°à¤¾à¤²à¤¯ की नीतियों के परामरà¥à¤¶ में à¤à¥€ महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ à¤à¥‚मिका निà¤à¤¾à¤ˆ है।
à¤à¤• बहà¥à¤†à¤¯à¤¾à¤®à¥€ कलाकार के रूप में, शà¥à¤°à¥€ नरहरी à¤à¤• पà¥à¤°à¤¶à¤¿à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ तबला और पखावज वादक हैं, और वे गरà¥à¤µ से फरà¥à¤°à¥à¤–ाबाद घराने से संबंध रखते हैं, जो ताल वादà¥à¤¯ परंपरा की सबसे पà¥à¤°à¤¾à¤šà¥€à¤¨ और पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤ ित परंपराओं में से à¤à¤• है।
à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ शासà¥à¤¤à¥à¤°à¥€à¤¯ संगीत के संरकà¥à¤·à¤£, संवरà¥à¤§à¤¨ और आधà¥à¤¨à¤¿à¤• संदरà¥à¤à¥‹à¤‚ में उसके पà¥à¤¨à¤°à¥à¤¸à¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¨ के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ उनका योगदान अतà¥à¤¯à¤‚त महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ और पà¥à¤°à¥‡à¤°à¤£à¤¾à¤¦à¤¾à¤¯à¤• है।